हम जीते हैं

हम जीते हैं हम मरते हैं

देखो तुम बिन क्या क्या करते हैं 

इस दिल की ये धड़कन भी 

पहिये की धड़ धड़ लगती है 

मेरी आँखों का सूनापन

सबको सूनामी सी लगती है 

ओढ़ा है मैंने इक चेहरा 

सब कहते हैं.. 

तू इतना खुश क्यों रहती है 

 हम जीते हैं हम मरते हैं 

देखो तुम बिन क्या क्या करते हैं 


          श्वेता भारद्वाज (17/3/17)

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